Oct 22, 2019

मुसलमान और नमाज़ ?

नहीं ऐसा नहीं है.

प्रत्येक मुस्लिम पांचो समय की नमाज नहीं पड़ता है , कुछ दो टाइम की नमाज पढ़ते हैं कुछ तीन टाइम की कुछ चार टाइम की और कुछ सिर्फ जुम्मा ही पढ़ते हैं और कुछ पांचो टाइम की पढ़ते हैं ।

हालांकि कुरान ने कहा है कि पांचो टाइम की नमाज फर्ज है ।

यानी इस्लाम में पांच वक्त की नमाज हर मुसलमान पर फर्ज है लेकिन लोग 5 समय की नमाज नहीं पढ़ते हैं।

तो जो नमाज नहीं पढ़ते हैं यह उनका अमल है जिसके बारे में उनसे अल्लाह सवाल करेगा ।

कुरान ने एक आयत में कहा है :

فويل للمصلين الذين هم عن صلاتهم ساهون (سورة الماعون)

अनुवाद: उन नमाजियों के लिए खराबी है जो अपनी नमाजो को भूले हुए हैं

नमाज एक ऐसी इबादत (प्रार्थना) है कि जिसको करने के बाद या इसको जो रेगुलर पढ़ते हैं , उन को नमाज़ बुराई और बेहयाई से रोकती है।

कुरान कहता है:

إن الصلاة تنهى عن الفحشاء والمنكر ( 21)

अनुवाद.: बेशक नमाज बेहयाई और बुरी बातों से रोकती है.

और नमाज ही के बारे में एक जगह कुरान में यह भी कहा गया है:

يا أيها الذين آمنوا استعينوا بالصبر والصلاة.

अनुवाद: ए इमान वालों सबर और नमाज़ से मदद मांगो।

इसीलिए देखा गया है या आपने भी देखा होगा जो सच्चे नमाजी होते हैं वह झूठ नही बोलते हैं, किसी को धोखा नहीं देते हैं, और किसी के साथ बेवफाई नहीं करते हैं,।

अगर कोई झूठ ,फरेब ,चोरी ,बेवफाई ,धोखाधड़ी कर रहा है तो वह सच्चा मुसलमान नहीं है।

धन्यवाद.

QR कोड क्या है?

QR कोड abbreviated हे (Quick Response code) से, एक प्रकार का मैट्रिक्स बारकोड के लिए ट्रेडमार्क है, पहली बार जापान में मोटर वाहन उद्योग ( automotive industry in Japan)के लिए 1994 में डिज़ाइन किया गया.

मानक UPC बारकोड की तुलना में इसकी तेजी से पठनीयता और अधिक भंडारण क्षमता के कारण QRS ऑटोमोटिव उद्योग के बाहर लोकप्रिय हो गया।

एक QR कोड में एक सफेद पृष्ठभूमि पर एक वर्ग ग्रिड में व्यवस्थित काले वर्ग होते हैं, जिसे एक इमेजिंग डिवाइस जैसे कि एक कैमरा द्वारा पढ़ा जा सकता है.

QR code system का आविष्कार 1994 में जापानी कंपनी डेंसो वेव ने किया था।

इसका उद्देश्य manufacturing के दौरान वाहनों को ट्रैक करना था; यह तेज़ रफ़्तार स्कैनिंग के लिए डिज़ाइन किया गया था।

लेकिन आज, QR कोड्स को फ़्लायर्स, पोस्टर, मैगज़ीन आदि पर देखा जा सकता है।

जब आप अपने स्मार्टफ़ोन का उपयोग करके एक QR कोड स्कैन करते हैं, तो आपको इसके कंटेंट तक फ़ौरन access मिल जाता है।

क्यूआर कोड का एक और फायदा यह है कि इसे स्क्रीन से स्कैन किया जा सकता है।

धन्यवाद , आप से शेयर को नहीं कहूंगा

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Oct 21, 2019

आतंकवाद और इस्लाम?


यह वह लोग हैं जो इस्लाम को नहीं मानते क्योंकि इस्लाम को मानने का अर्थ है जमीन में फसाद ना चाहना, जमीन में बगावत ना करना।
क़ुरआन की इस आयत को सुनिए:

((تلك الدار الآخرة نجعلها للذين لا يريدون علواً في الأرض ولا فساداً، والعاقبة للمتقين)) [القصص/ 83]

अनुवाद : और वह जो आख़िरत का घर है हमने इसे उन लोगों के लिए तैयार किया है, जो भूमि में अन्याय और भ्रष्टाचार करने का इरादा नहीं रखते हैं, और अंत तो परहेज़गारों के लिए हे।

इस का मतलब है की वह लोग जो देश में , ज़मीन में , फसाद मचाते हैं , उनका ठिकाना जहन्नम है , वो लोग इस्लाम की तालीम पे अमल नही करते हैं , बल्कि इस्लाम के लिबादे में इस्लाम को बदनाम करते हैं.
आयए में आपको क़ुरआन की एक और ऐसी आयत दिखाता हो जिस से आपके रोंगटे खड़े हो जाएँ गए , और आप खुद कहेंगे की आतंगबाद का इस्लाम से कोई लेना देना नही हे ,बल्कि कुछ संगठन इस्लाम को बदनाम करना चाहते हैं,

क़ुरआन कहता है:

((ولا تبغ الفساد في الأرض إن الله لا يحب المفسدين. ))[القصص/ 77].

अनुवाद: ज़मीन में या मुल्क में फसाद न चाहो इसलिए की फ़साद करने वाले अल्लाह के नज़दीक पसंदीदा नहीं हैं.
आईये आपको एक क़ुरान की ऐसी आयत दिखाता हूँ जो अपने शायद पहले नहीं सुनी हो , जिस को पढ़ कर आपको इस्लाम का सही अर्थ और उसकी हक़ीक़त का पता चले गा.

क़ुरआन कहता है:

مِنْ أَجْلِ ذَٰلِكَ كَتَبْنَا عَلَىٰ بَنِي إِسْرَائِيلَ أَنَّهُ مَن قَتَلَ نَفْسًا بِغَيْرِ نَفْسٍ أَوْ فَسَادٍ فِي الْأَرْضِ فَكَأَنَّمَا قَتَلَ النَّاسَ جَمِيعًا وَمَنْ أَحْيَاهَا فَكَأَنَّمَا أَحْيَا النَّاسَ جَمِيعًا ۚ وَلَقَدْ جَاءَتْهُمْ رُسُلُنَا بِالْبَيِّنَاتِ ثُمَّ إِنَّ كَثِيرًا مِّنْهُم بَعْدَ ذَٰلِكَ فِي الْأَرْضِ لَمُسْرِفُونَ ﴿٣:۵﴾

(source of this ayah translation only )

अनुवाद: इसी वजह से हमने बनी इस्राइल पर (नाज़िल की गई तौरात में यह आदेश) लिख दिया (था) कि जिसने किसी व्यक्ति को बिना किसास के या ज़मीन में फसाद (फैलाने अर्थात खूँ रेज़ी और डाका जनी आदि की सजा) के (बिना हक़) क़त्ल कर दिया तो गोया उसने (समाज के) सारे लोगों को कत्ल कर दिया और जिसने उसे (नाहक मरने से बचा कर) जीवित रखा तो गोया उसने (समाज के) सारे लोगों को जीवित रखा (अर्थात उसने इंसानी जीवन का सामूहिक निज़ाम बचा लिया), और बेशक उनके पास हमारे रसूल स्पष्ट निशानियाँ ले कर आए फिर (भी) उसके बाद उनमें से अक्सर लोग यक़ीनन ज़मीन में हद से आगे बढ़ने वाले हैंl (सुरह मायदा ५:३२)

आप खुद देख लीजिए इंसाफ की नज़र से और इन आयात का इंग्लिश अनुवाद भी देख लीजिये , क़ुरान ने कितने स्थान पे ज़मीन और समाज में फसाद करने से मना क्या हे , तो वो लोग जो मासूमों को क़तल करते हैं उनका इस्लाम से कोई ताल्लुक़ नहीं है , और जो उनको देख कर इस्लाम पे ऊँगली उठा रहा है तो इसका मतलब है उसने इस्लाम को नही पड़ा हे.
पढ़ने के लिए धन्यवाद , में आप से शेयर करनेे नही कहूंगा.
मुहम्मद रागिब

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